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राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी: एकता, शांति और समरसता का संकल्प।

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राजभवन में सर्वधर्म गोष्ठी: एकता, शांति और समरसता का संकल्प

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

देहरादून।
राज्य की एकता, शांति और सौहार्द को मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को राजभवन, देहरादून में सर्वधर्म गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी सहित विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों, संतों, धर्मगुरुओं और समाजसेवियों ने सहभागिता की।

राज्यपाल श्री गुरमीत सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन राष्ट्र के प्रति हमारे साझा उत्तरदायित्व की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि हम सभी यहां धर्म, जाति और मत की सीमाओं से ऊपर उठकर एक उद्देश्य के लिए एकत्रित हुए हैं – राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा हेतु एकजुटता का संकल्प

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राज्यपाल ने सभी धर्मों की मूल शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदू धर्म ‘सर्वे भवंतु सुखिनः’ की बात करता है, सिख धर्म ‘एकम भावना’ को महत्व देता है, बौद्ध धर्म आत्मज्ञान की प्रेरणा देता है, जैन धर्म अहिंसा को सर्वोपरि मानता है, इस्लाम शांति और समरसता की राह दिखाता है और ईसाई धर्म क्षमा और प्रेम का संदेश देता है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जब भी देश पर संकट आया है, तब हर मत, पंथ और जाति के लोगों ने एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा की है। उन्होंने वेद मंत्र “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्” उद्धृत करते हुए कहा कि हमें एक मन, एक विचार और एक लक्ष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए।

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मुख्यमंत्री ने कहा, “धर्म का उद्देश्य केवल पूजा-पद्धतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मूल है – सत्य, करुणा, प्रेम और समरसता की स्थापना।” उन्होंने कहा कि त्रेता युग में श्रीराम, द्वापर में श्रीकृष्ण, गुरु गोविंद सिंह, ईसा मसीह और पैग़म्बर मोहम्मद साहब सभी ने धर्म के लिए बलिदान और समरसता का मार्ग दिखाया है।

उन्होंने उत्तराखंड की वीर भूमि को बलिदान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया और कहा कि हमारे सैनिकों ने हर परिस्थिति में देश का गौरव बढ़ाया है। आज हमें भी अपने विचारों और कर्मों से राष्ट्र की सेवा करनी है।

परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि “पूजा पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी भक्ति केवल राष्ट्रभक्ति होनी चाहिए।”

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उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष  शादाब शम्स ने कहा कि भारत से सुंदर देश कोई नहीं और हम सभी भारत माता की संतान हैं।

इस अवसर पर बौद्ध धर्मगुरु श्री सोनम चोग्याल, ईसाई समुदाय के ब्रदर जोसेफ एम. जोसेफ तथा सिख समुदाय के सरदार गुरबक्श सिंह राजन ने भी अपने विचार रखते हुए राष्ट्र की अखंडता एवं संप्रभुता बनाए रखने की अपील की।

कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव  रविनाथ रमन, सूचना महानिदेशक  बंशीधर तिवारी सहित विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, समाजसेवी और नागरिक उपस्थित रहे।