कॉर्बेट साहित्य महोत्सव में ‘जीवनदायी हिमालय’ पर हुआ सार्थक संवाद

कॉर्बेट साहित्य महोत्सव में ‘जीवनदायी हिमालय’ पर हुआ सार्थक संवाद

रोशनी पांडेय प्रधान सम्पादक

रामनगर। कॉर्बेट साहित्य महोत्सव-2026 के अंतर्गत सवाल्देह स्थित आहाना रिजॉर्ट में ‘जीवनदायी हिमालय’ विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं इतिहासकार डॉ. शेखर पाठक और पद्मश्री अनूप साह ने हिमालय की प्राकृतिक संपदा, बदलते पर्यावरण और संरक्षण की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए।

 

 

 

 

डॉ. शेखर पाठक ने हिमालय के साथ अपने लंबे जुड़ाव और वर्षों की यात्राओं के अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय के साथ हिमालयी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने चिपको आंदोलन की पर्यावरणीय चेतना को आज के दौर में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि हिमालय को बचाने के लिए विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बेहद जरूरी है।

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पद्मश्री अनूप साह ने अपने दशकों लंबे फोटोग्राफी अनुभव के माध्यम से हिमालय की बदलती तस्वीर को सामने रखा। उन्होंने बताया कि कैमरे में दर्ज हिमालय की खूबसूरत तस्वीरों के साथ-साथ पर्यावरण में हो रहे बदलाव भी स्पष्ट दिखाई देते हैं। उनके अनुभवों ने हिमालय के संरक्षण की आवश्यकता को और गंभीरता से सामने रखा।

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सत्र के दौरान जलवायु परिवर्तन, हिमालयी पारिस्थितिकी, जल स्रोतों के संरक्षण, बढ़ते पर्यटन और अनियोजित विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि हिमालय केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र नहीं, बल्कि देश के जल, जैव-विविधता और करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

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कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि हिमालय के संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार या पर्यावरणविदों की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है। स्थानीय समुदायों और युवाओं की भागीदारी से ही हिमालय को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

कॉर्बेट साहित्य महोत्सव में आयोजित यह सत्र साहित्य, प्रकृति और पर्यावरण के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना।

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