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लकड़ी माफियाओं को संरक्षण या प्रशासन की मिलीभगत?

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लकड़ी माफियाओं को संरक्षण या प्रशासन की मिलीभगत?

सलीम अहमद साहिल  – संवाददाता

 

रामनगर/मालधनचौड़।
रामनगर तहसील के मालधनचौड़–चौड़ मोहन नगर सीमा क्षेत्र में लकड़ी माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सिंचाई विभाग की भूमि पर खड़े हरे-भरे पेड़ दिन-दहाड़े काटे जा रहे हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं।

आरोपितों पर दर्जनों मुकदमे दर्ज होने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वर्ष 2021 में तत्कालीन सीओ बलजीत सिंह भकुनी ने गुंडा एक्ट में कार्रवाई के निर्देश दिए थे, मगर उन पर अमल नहीं हुआ। यही कारण है कि अपराधियों के हौसले अब बुलंद हैं।

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हरे पेड़ों की खुली लूट – विभाग मौन

काशीपुर सिंचाई विभाग की भूमि पर खड़े यूकेलिप्टस और अन्य प्रजातियों के सैकड़ों पेड़ों की अवैध कटाई जारी है। करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति पर हो रही इस लूट के खिलाफ विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

वन विभाग की कार्रवाई अधूरी

वन विभाग ने कुछ गिल्टों और एक डंपर को जब्त तो किया, लेकिन कार्रवाई केवल खानापूर्ति बनकर रह गई। पतरामपुर रेंजर महेश सिंह बिष्ट पर आरोप है कि वे अब माफियाओं के प्रवक्ता बनकर उनकी पैरवी कर रहे हैं। सवाल उठता है कि जब दर्जनों पेड़ लापता हैं, तो उनकी भरपाई कौन करेगा?

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ताज़ा मामला – 28 सितम्बर की सुबह

आज सुबह भी सिंचाई विभाग की भूमि पर धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई जारी रही। लगातार सूचना देने के बावजूद न तो वन विभाग और न ही सिंचाई विभाग ने कोई ठोस कदम उठाया।

प्रशासन और सरकार के लिए चुनौती

सरकारी संपत्ति की यह खुली लूट न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या विभाग और प्रशासन माफियाओं को संरक्षण दे रहे हैं? क्या राज्य सरकार के आदेशों का इन पर कोई असर नहीं रहा?

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स्थानीय जनता मांग कर रही है कि इस संगठित लूट पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाए। अन्यथा, यह लापरवाही प्रदेशभर में माफियाओं को और बेखौफ करेगी।