उत्तराखंड क्राइम नैनीताल

सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला: नामजद आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं।

Spread the love

सुखवंत सिंह आत्महत्या मामला: नामजद आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधाम सम्पादक

 

नैनीताल।
काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक और दर्ज मुकदमे को निरस्त किए जाने की मांग पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकलपीठ ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई राहत नहीं देते हुए राज्य सरकार से मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी मांगी है। अदालत ने सरकार को कल तक स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

यह भी पढ़ें 👉  ऑपरेशन प्रहार का बड़ा असर — लालकुआं और चोरगलिया में अवैध शराब माफियाओं पर पुलिस का ताबड़तोड़ प्रहार

 

 

 

 

प्रकरण के अनुसार, शनिवार देर रात हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल में काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले सुखवंत सिंह ने फेसबुक पर लाइव होकर कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन्होंने ऊधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा सहित पुलिस के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।

 

 

 

 

मृतक ने आरोप लगाया था कि उसके साथ जमीन के मामले में धोखाधड़ी की गई और उससे करीब चार करोड़ रुपये की ठगी हुई। उसने यह भी कहा था कि इस संबंध में बार-बार पुलिस से शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि उसे डराया-धमकाया गया।

यह भी पढ़ें 👉  आपदा प्रबंधन में उत्तराखण्ड बना मिसाल, श्रीलंकाई प्रतिनिधिमंडल ने किया अध्ययन भ्रमण

 

 

 

 

 

 

किसान की आत्महत्या के बाद पुलिस ने मृतक के भाई की तहरीर पर आईटीआई थाना, काशीपुर में 26 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया। जिनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है, उनमें अमरजीत सिंह, दिव्या, रविन्द्र कौर, लवप्रीत कौर, कुलविन्दर सिंह उर्फ ‘जस्सी’, हरदीप कौर, आशीष चौहान, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेन्द्र सिंह, विमल, विमल की पत्नी, देवेन्द्र, राजेन्द्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवन्त सिंह बक्सौरा, बिजेन्द्र, पूजा एवं जहीर शामिल हैं।

यह भी पढ़ें 👉  एग्री स्टैक कार्यों में तेजी लाएं अधिकारी, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने दिए सख्त निर्देश

 

 

 

आज हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि उनका इस आत्महत्या प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें आपसी जमीन विवाद के कारण गलत तरीके से फंसाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने तथा दर्ज मुकदमे को निरस्त करने की मांग की।

 

वहीं, न्यायालय ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार से मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई कल की जाएगी।