#जंगलों का जल्लाद कौन? पतरामपुर में साल के पेड़ों का सामूहिक कत्लेआम!”
#हरे सोने की लूट से दहला जसपुर! तस्करों के आगे बेबस दिखा विभाग”
#पतरामपुर के जंगलों में ‘हरा नरसंहार’! साल के पेड़ों पर चल रही आरी, वन विभाग पर उठे मिलीभगत के सवाल
जसपुर के पतरामपुर क्षेत्र में जंगलों की हरियाली पर कथित तौर पर लकड़ी माफियाओं का कहर टूट पड़ा है। साल के बेशकीमती और हरे-भरे पेड़ों को काटकर जंगलों का सीना छलनी किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी गतिविधियों के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित शह के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध कटान संभव नहीं है। जंगलों में कटे पड़े पेड़ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि तस्करों के हौसले कितने बुलंद हैं।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह सिर्फ पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य पर हमला है। एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ता नजर आ रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या वन विभाग लकड़ी माफियाओं पर शिकंजा कसेगा या फिर जंगलों की लूट यूं ही जारी रहेगी? क्या सरकार इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराएगी? और क्या दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई होगी?
जिस रफ्तार से जंगल उजड़ रहे हैं, उससे लगने लगा है कि आने वाले समय में पेड़ तस्वीरों में और ऑक्सीजन बाजारों में नजर आएगी।





