हिमनद झीलों के फटने से उत्तराखंड में आपदा का खतरा, नैनीताल में विशेषज्ञों ने बनाई रणनीति

हिमनद झीलों के फटने से उत्तराखंड में आपदा का खतरा, नैनीताल में विशेषज्ञों ने बनाई रणनीति

 

 

 

पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने और संवेदनशील हिमनद झीलों की निगरानी पर दिया जोर, कार्यशाला में 120 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा

नैनीताल। हिमनद झीलों के फटने से उत्पन्न होने वाली संभावित आपदाओं को देखते हुए नैनीताल स्थित डॉ. आर.एस. टोलिया उत्तराखण्ड प्रशासनिक अकादमी में सोमवार को महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) से जुड़े खतरों, वैज्ञानिक अध्ययन, जोखिम आकलन और आपदा से निपटने की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।

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महानिदेशक वी.पी. पाण्डे के दिशा-निर्देशों पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ अपर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग प्रकाश चन्द्रा, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मेजर जनरल सुधीर बहल, पद्मश्री डॉ. शेखर पाठक, पद्मश्री अनूप साह और संयुक्त निदेशक डॉ. महेश कुमार की उपस्थिति में हुआ।

मुख्य अतिथि प्रकाश चन्द्रा ने बताया कि हिमनद झीलों का वैज्ञानिक अध्ययन और जोखिम आकलन किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

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वहीं मेजर जनरल सुधीर बहल ने सिक्किम में हिमनद झील फटने से आई आपदा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय रहते चेतावनी, त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।

 

 

 

 

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने हिमनद झीलों की पहचान एवं निगरानी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन और संभावित आपदाओं से पहले प्रभावी तैयारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार रखे।

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इस दौरान वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, कुमाऊं विश्वविद्यालय, जीबी पंत विश्वविद्यालय, आईआईआरएस देहरादून, सीबीआरआई रुड़की सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजू पाण्डे ने किया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों एवं संस्थानों के कुल 120 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।