🚨 आम के हरे-भरे बगीचे पर संकट! पेड़ों की बलि देकर बनेगा होटल, आखिर पर्यावरण की सुध कौन लेगा?
रोशनी दर्पण न्यूज़
एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक हरे-भरे आम के बगीचे पर संकट मंडराने की खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि बगीचे को काटकर वहां होटल का निर्माण किया जाना है।
इस बगीचे में बड़ी संख्या में आम के पेड़ लगे हुए हैं। सवाल यह है कि आखिर इन वर्षों पुराने पेड़ों का क्या होगा? क्या होटल निर्माण के लिए इन पेड़ों को काटना जरूरी है? क्या पेड़ों को बचाते हुए विकास का रास्ता नहीं निकाला जा सकता?
आम के ये पेड़ केवल फल ही नहीं देते, बल्कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ पक्षियों और अन्य जीवों का आशियाना भी हैं। यदि पूरा बगीचा उजाड़ दिया गया तो इसकी भरपाई कौन करेगा?
अब प्रशासन और वन विभाग से सवाल है कि क्या पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई है? कितने पेड़ प्रभावित होंगे? क्या विभाग ने मौके का निरीक्षण किया है?
होटल निर्माण से रोजगार और सुविधाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन क्या इसकी कीमत वर्षों पुरानी हरियाली को खत्म करके चुकाई जाएगी? जरूरत है कि पेड़ों पर आरी चलने से पहले संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच करें और स्थिति स्पष्ट करें।
🌳 होटल बनाने के लिए जमीन मिल सकती है, लेकिन वर्षों पुराने आम के पेड़ दोबारा तैयार करने में दशकों लग जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, उक्त बगीचे को काटकर वहां होटल निर्माण की तैयारी की जा रही है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभागों से आधिकारिक पुष्टि और पेड़ों की कटाई की अनुमति को लेकर जानकारी जुटाई जा रही है।
रोशनी दर्पण न्यूज़ | रामनगर
