🚨 पूछड़ी जमीन प्रकरण: सरकारी जमीन के कथित सौदों का खेल! गरीबों से पैसे लेकर कौन बना मालामाल? ताहिर की भूमिका जांच के घेरे में कब आएगी?
रामनगर (नैनीताल)। पूछड़ी में सरकारी वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में 80 से अधिक परिवारों के आशियाने उजड़ गए। किसी का घर मलबे में बदल गया तो किसी की जिंदगीभर की जमा-पूंजी मिट्टी में मिल गई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब एक और गंभीर सवाल उठ रहा है—आखिर गरीब परिवारों को सरकारी जमीन पर बसाने और उनसे पैसे लेने के कथित खेल के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे?
इस मामले में ताहिर नाम के व्यक्ति पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उसने गरीब परिवारों को जमीन दिलाने के नाम पर उनसे रकम वसूली और सरकारी जमीन के सौदों के जरिए लोगों को गुमराह किया। यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि गरीब परिवारों की मेहनत की कमाई से जुड़े गंभीर सवालों का मामला है।
गरीबों के घर टूटे, कथित सौदे कराने वालों की जवाबदेही कौन तय करेगा?
जिन परिवारों ने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर जमीन खरीदी, आज वे बेघर हैं। उनके सामने रहने और परिवार पालने का संकट खड़ा है। सवाल यह है कि जमीन सरकारी थी तो उसे बेचने या पैसे लेकर कब्जा दिलाने का अधिकार किसने दिया? लोगों से रकम लेने वालों की जांच क्यों नहीं हो रही?
प्रशासन से सीधे सवाल:
– ताहिर की कथित भूमिका की जांच कब होगी?
– गरीब परिवारों से ली गई रकम का हिसाब कौन देगा?
– सरकारी जमीन के कथित सौदों में और कौन-कौन शामिल था?
– क्या पुलिस और वन विभाग मिलकर पूरे नेटवर्क की जांच करेंगे?
– पीड़ित परिवारों को उनकी मेहनत की कमाई वापस दिलाने के लिए क्या कार्रवाई होगी?
अब सिर्फ गरीबों के आशियाने उजाड़ने से इंसाफ पूरा नहीं होगा। अगर सरकारी जमीन बेचकर लोगों से पैसे वसूले गए हैं तो कथित सौदेबाजों और इसमें शामिल हर व्यक्ति की भूमिका सामने आनी चाहिए। कानून के तहत दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
रोशनी दर्पण न्यूज़ का सवाल: गरीब बेघर हो गए, अब कथित जमीन के सौदों का हिसाब कब होगा?
रोशनी दर्पण न्यूज़ | रामनगर की आवाज़
