कॉर्बेट में पहली बार जंगल के बीच सजेगा साहित्य का संसार, 6 अक्टूबर से शुरू होगा Corbett Literature Festival 2026

कॉर्बेट में पहली बार जंगल के बीच सजेगा साहित्य का संसार, 6 अक्टूबर से शुरू होगा Corbett Literature Festival 2026

रोशनी पांडे प्रधान संपादक

 

 

 

रामनगर (नैनीताल)। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की पहचान अब सिर्फ टाइगर सफारी तक सीमित नहीं रहने वाली है। रामनगर में पहली बार Corbett Literature Festival 2026 का आयोजन होने जा रहा है। 6 से 9 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला यह आयोजन साहित्य, वन्यजीव, संरक्षण, पर्यटन और उत्तराखंडी संस्कृति को एक मंच पर लेकर आएगा।

 

 

 

 

 

फेस्टिवल की थीम “Where Literature Meets the Landscape” रखी गई है। आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य साहित्य को किताबों और सभागारों से बाहर निकालकर उस प्राकृतिक परिवेश के बीच ले जाना है, जिसने देश-दुनिया के लेखकों और वन्यजीव प्रेमियों को हमेशा आकर्षित किया है।

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तीन दिन, 20 से ज्यादा सत्र और 30 से अधिक प्रमुख हस्तियां

फेस्टिवल में तीन दिनों के दौरान 20 से अधिक सत्र और 30 से ज्यादा प्रतिष्ठित लेखक, संरक्षणविद, फोटोग्राफर, वैज्ञानिक, इतिहासकार और पत्रकार शामिल होंगे। कार्यक्रम के लिए The Golden Tusk, Aahana Resort और The Riverview Retreat समेत तीन प्रमुख वेन्यू तय किए गए हैं।

पहले दिन “Stories of Nature” थीम के तहत हिमालय की कहानियां, वन्यजीव फोटोग्राफी, उत्तराखंडी लोककथाएं, संगीत और प्राकृतिक विरासत पर चर्चा होगी।

दूसरे दिन “All Things Wild” में कॉर्बेट को टाइगर से आगे देखने, वन्यजीव संरक्षण, शहरों और वन्यजीवों के रिश्ते तथा जिम्मेदार पर्यटन जैसे विषयों पर मंथन होगा।

तीसरे दिन “People, Places & The Wild” थीम के तहत जंगल, नदियों, इतिहास, पर्यटन और प्रकृति लेखन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित होंगे।

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जोन-वार पर्यटन के आंकड़ों ने भी खींचा ध्यान

फेस्टिवल से जुड़े प्रेजेंटेशन में कॉर्बेट के जोन-वार पर्यटन के आंकड़े भी सामने रखे गए। नाइट-स्टे में ढिकाला 3,834 बुकिंग के साथ सबसे आगे रहा, जो कुल बुकिंग का करीब 68.56 प्रतिशत बताया गया है। इसके बाद बिजरानी में 902 बुकिंग दर्ज की गईं।

वहीं सफारी जोन में ढिकाला 15,886 और बिजरानी 14,372 सफारी के साथ प्रमुख रहे। इसके बाद झिरना में 9,721 और ढेला में 8,356 सफारी दर्ज की गईं। दुर्गादेवी और सीतावनी जैसे क्षेत्रों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही।

इन आंकड़ों ने कॉर्बेट में पर्यटन के दबाव और बफर जोन को बढ़ावा देने की जरूरत को भी सामने रखा है। फेस्टिवल में “Conscious Travel” यानी जिम्मेदार और संवेदनशील पर्यटन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

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जंगल बनेगा साहित्य का मंच

इस आयोजन की खास बात यह होगी कि साहित्यिक चर्चाएं केवल बंद हॉल तक सीमित नहीं रहेंगी। जंगल, साल के पेड़, नदियां और कॉर्बेट का प्राकृतिक परिदृश्य खुद इस फेस्टिवल का हिस्सा बनेंगे।

 

 

 

 

नेचर वॉक, बुक फेयर, पैनल डिस्कशन, रीडिंग और “Storytelling under the Sal Forest” जैसे कार्यक्रमों के जरिए साहित्य और प्रकृति का अनूठा मेल देखने को मिलेगा।

कॉर्बेट की ऐतिहासिक विरासत, वन्यजीव संरक्षण और उत्तराखंडी संस्कृति को साहित्य से जोड़ने वाला यह आयोजन रामनगर को एक नए सांस्कृतिक और साहित्यिक पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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