फर्जी प्रमाण पत्रों के खेल में ‘खानापूर्ति’! एक पटवारी निलंबित, बड़े जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?

फर्जी प्रमाण पत्रों के खेल में ‘खानापूर्ति’! एक पटवारी निलंबित, बड़े जिम्मेदारों पर कब होगी कार्रवाई?

 

रोशनी पांडे प्रधान सम्पादक

 

 

बाजपुर तहसील में ‘खानापूर्ति’ की कार्रवाई: क्या सिर्फ एक ही पटवारी की आईडी से बने फर्जी प्रमाण पत्र? अधिकारियों के ‘बचपे खेल’ पर उठे गंभीर सवाल!

 

 

 

​बाजपुर। उधम सिंह नगर जिले की तहसील बाजपुर में फर्जी और कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास व जाति प्रमाण पत्र जारी करने का खेल जिस बड़े पैमाने पर सामने आया है, वह महज एक पटवारी के निलंबन से शांत होने वाला नहीं है। बीते 26 सितंबर को उप जिलाधिकारी (SDM) बाजपुर ने क्षेत्र विराहा के राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी) मो. अजमल को तहसीलदार की जांच आख्या और असंतोषजनक स्पष्टीकरण के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित तो कर दिया, लेकिन इस पूरी कार्रवाई की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या बाजपुर तहसील में सिर्फ एक ही फर्जी प्रमाण पत्र बना था? और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या सिर्फ एक ही पटवारी या उसकी ‘आईडी’ (ID) का इस्तेमाल करके ही फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए गए थे? क्या तहसील में बाकी पटवारियों की आईडी से ऐसे कोई फर्जी प्रमाण पत्र जारी ही नहीं हुए? अगर अन्य पटवारियों की आईडी से भी फर्जीवाड़े का यह खेल खेला गया है, तो आखिर गाज सिर्फ एक ही पटवारी पर क्यों गिरी और बाकी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
​यह पूरी कार्रवाई प्रशासनिक अमले द्वारा अपनी साख बचाने और जनता की आंखों में धूल झोंकने की एक सोची-समझी ‘खानापूर्ति’ प्रतीत होती है। हकीकत यह है कि बाजपुर तहसील में फर्जीवाड़े का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। नियमतः, पटवारी की आख्या के बाद अंतिम हस्ताक्षर और स्वीकृति तहसीलदार व उप जिलाधिकारी स्तर से होती है, जिनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे किसी भी प्रमाण पत्र को जारी करने से पहले गहन जांच करें। ऐसे में केवल निचले स्तर के एक कर्मचारी को बलि का बकरा बनाकर बड़े जिम्मेदार अधिकारियों का साफ बच निकलना कानून की दोहरी परिभाषा को दर्शाता है।

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जनता में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि फर्जीवाड़ा करने वाले ये राजस्व कर्मचारी कहीं खुद भी फर्जी दस्तावेजों के सहारे तो इस सरकारी नौकरी तक नहीं पहुंचे हैं? सरकार को तुरंत बाजपुर तहसील में तैनात ऐसे कर्मचारियों के शैक्षणिक व निवास प्रमाण पत्रों की गहन जांच करानी चाहिए। सिर्फ नाममात्र की कार्रवाई करके पूरे भ्रष्ट तंत्र और रसूखदार चेहरों को अभयदान देने का यह खेल बंद होना चाहिए और इस फर्जीवाड़े में शामिल हर जिम्मेदार पर सख्त कानूनी शिकंजा कसना चाहिए।

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