“स्कूल नहीं, शॉपिंग मॉल!” निजी स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
हल्द्वानी। जनपद नैनीताल में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। ललित मोहन रयाल के निर्देश पर चल रही जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। अब तक 105 निजी विद्यालयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
ताजा कार्रवाई में गोविंद राम जायसवाल द्वारा 4 और निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है। प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि कई स्कूलों द्वारा एनसीईआरटी की सस्ती किताबों के बजाय महंगी निजी प्रकाशनों की पुस्तकें जबरन लागू की जा रही थीं। इतना ही नहीं, अभिभावकों पर विशेष दुकानों से किताबें और स्टेशनरी खरीदने का दबाव भी बनाया जा रहा था।
“स्कूल या कमाई का केंद्र?”
सूत्रों के अनुसार कई स्कूलों में किताबों, यूनिफॉर्म और अन्य शिक्षण सामग्री के नाम पर अभिभावकों से भारी रकम वसूली जा रही थी। कई विद्यालयों की वेबसाइट पर फीस और पुस्तक सूची तक सार्वजनिक नहीं की गई, जो नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
प्रशासन का बड़ा अल्टीमेटम
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि:
- 15 दिन के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी करनी होगी
- NCERT पुस्तकों को प्राथमिकता देनी होगी
- अनावश्यक पुस्तकों पर अभिभावकों को राहत देनी होगी
- अतिरिक्त वसूली गई फीस का समायोजन करना होगा
नहीं माने तो जाएगी मान्यता!
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेशों की अनदेखी करने वाले स्कूलों के खिलाफ मान्यता निलंबन, निरस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावकों में राहत, स्कूलों में हड़कंप
इस कार्रवाई के बाद जहां अभिभावकों में राहत की उम्मीद जगी है, वहीं निजी स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर जिला प्रशासन का यह अब तक का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है।





