चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता अत्यंत महत्वपूर्ण : प्रो. स्वर्ण सिंह*

 

*चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता के बीच भारत की रणनीतिक स्वायत्तता अत्यंत महत्वपूर्ण : प्रो. स्वर्ण सिंह*

 

रोशनी पांडे प्रधान संपादक

 

पी.एन.जी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर के *करियर परामर्श एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ* के तत्वावधान में शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ प्रो. स्वर्ण सिंह का *“चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता और भारत की रणनीति”* विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। महाविद्यालय के सम्मेलन कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राध्यापकों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की।

 

 

 

 

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. स्वर्ण सिंह ने अपने व्याख्यान में अमेरिका और चीन के मध्य बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य तथा भारत की विदेश नीति के समक्ष उपस्थित चुनौतियों एवं संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा केवल आर्थिक वर्चस्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तकनीकी विकास, व्यापार, सैन्य शक्ति, समुद्री सुरक्षा, कूटनीतिक प्रभाव तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में नेतृत्व जैसे अनेक आयाम शामिल हैं।

प्रो. सिंह ने रेखांकित किया कि इस बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। भारत को अपनी विदेश नीति का निर्धारण करते समय राष्ट्रीय हितों, सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं, आर्थिक विकास तथा क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि *भारत की रणनीतिक स्वायत्तता उसकी विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण आधार है*, जिसके अंतर्गत भारत अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप विभिन्न देशों के साथ अपने संबंधों का निर्धारण स्वतंत्र रूप से करता है।

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उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सामरिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की स्थिरता तथा विभिन्न देशों के बीच सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत के लिए आवश्यक है कि वह बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सूक्ष्म विश्लेषण करे, अपने सामरिक एवं आर्थिक हितों की रक्षा करे तथा वैश्विक मंचों पर सक्रिय और संतुलित भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का अध्ययन केवल तात्कालिक घटनाक्रम के आधार पर न करके उनके ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक संदर्भों में करने के लिए प्रेरित किया।

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महाविद्यालय के प्राचार्य *प्रो. एम. सी. पांडे* ने अपने वक्तव्य में कहा कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और वैश्विक शक्ति-संतुलन की समझ विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और अकादमिक जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में इस प्रकार के बौद्धिक एवं शोधपरक कार्यक्रमों का आयोजन विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से परे व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। उन्होंने प्रो. स्वर्ण सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आशा व्यक्त की कि उनके विचार महाविद्यालय के प्राध्यापकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के अकादमिक विकास में सहायक सिद्ध होंगे।

 

 

 

 

 

कार्यक्रम का संचालन करियर परामर्श एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ के समन्वयक *डॉ. पंकज प्रियदर्शी* ने किया। उन्होंने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत करते हुए व्याख्यान की समसामयिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला तथा उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि करियर परामर्श एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ का उद्देश्य केवल रोजगार संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के बौद्धिक विकास, समसामयिक विषयों की समझ और विशेषज्ञों के साथ संवाद के अवसर उपलब्ध कराना भी है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में शोधपरक दृष्टिकोण विकसित करने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रकोष्ठ के सह-समन्वयक *डॉ. प्रकाश सिंह बिष्ट* एवं *डॉ. विजय कुमार* ने विशेष सहयोग प्रदान किया। उनके सहयोग से कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं समन्वय संबंधी कार्यों को सुचारु रूप से संपन्न किया गया।

इस अवसर पर *प्रो. नूतन श्रीवास्तव, प्रो. पुनीता कुशवाहा, प्रो. सी. एस. नेगी, प्रो. सी. एस. जोशी, प्रो. लवकुश, डॉ. सिराज अहमद, प्रो. अनीता जोशी, प्रो. महिपाल सिंह, प्रो. मीना शर्मा, डॉ. विजय कुमार, डॉ. प्रकाश चंद्र सिंह, डॉ॰ प्रभाकर त्यागी, डॉ. बृजेश कुमार यादव* सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम ने महाविद्यालय में अकादमिक संवाद, शोधपरक चिंतन तथा समकालीन अंतरराष्ट्रीय विषयों पर विमर्श को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जारीकर्ता:
करियर परामर्श एवं प्लेसमेंट सेल
पी.एन.जी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर (नैनीताल)

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