रामनगर में पहले कॉर्बेट साहित्य महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, वन मंत्री सुबोध उनियाल ने किया शुभारंभ

रामनगर में पहले कॉर्बेट साहित्य महोत्सव-2026 का भव्य आगाज, वन मंत्री सुबोध उनियाल ने किया शुभारंभ

 

 

रोशनी पांडेय, प्रधान संपादक

रामनगर। कॉर्बेट की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से पहले कॉर्बेट साहित्य महोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। धिकुली स्थित रिवर व्यू रिट्रीट रिसॉर्ट में उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। छह से नौ अक्टूबर तक आयोजित इस महोत्सव में साहित्य, प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

 

 

 

 

उत्तराखंड वन विभाग, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और उत्तराखंड पर्यटन विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस महोत्सव के पहले दिन कोसी नदी के तट पर ‘स्टोरीज फ्रॉम ए लिविंग लैंडस्केप’ थीम के तहत कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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किताबें समाज का दर्पण, दुनिया तक पहुंचेगी कॉर्बेट की कहानी: सुबोध उनियाल

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि किताबें समाज का दर्पण होती हैं और आने वाली पीढ़ियां साहित्य के माध्यम से अपने इतिहास, संस्कृति और विरासत को जानती हैं। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट साहित्य महोत्सव कॉर्बेट की अनूठी कहानी को देश और दुनिया तक पहुंचाने में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि कॉर्बेट की पहचान केवल बाघों और घने जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की समृद्ध संस्कृति, स्थानीय जनजीवन और लोगों से जुड़ी कहानियां भी इसकी विशेष पहचान हैं। महोत्सव के माध्यम से इन सभी पहलुओं को साहित्य के जरिए सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आयोजन लोगों को अपनी अनुभूतियों, अनुभवों और विचारों को कविता व कहानियों के रूप में व्यक्त करने के लिए भी प्रेरित करेगा।

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वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु ने कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला की इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रयास उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक उदाहरण बन सकता है। हिमालय और कॉर्बेट भारत की वैश्विक पहचान के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं।

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वहीं, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) नीना ग्रेवाल ने कहा कि महोत्सव के माध्यम से साहित्य, प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को एक साझा मंच प्रदान किया गया है। इससे पर्यटकों और साहित्य प्रेमियों को कॉर्बेट की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

साहित्यकारों और प्रकृति प्रेमियों का जुटेगा संगम

महोत्सव में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वन्यजीव लेखक, फोटोग्राफर, इतिहासकार, पक्षी विशेषज्ञ, पर्यावरणविद और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। चार दिवसीय यह आयोजन कॉर्बेट की प्राकृतिक विरासत, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय संस्कृति को साहित्य के माध्यम से नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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