क्या रामनगर भी बनेगा दिल्ली जैसा प्रदूषित शहर? होटल निर्माण के नाम पर आम के बगीचे पर संकट, आखिर हरियाली बचाएगा कौन?
रामनगर। कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और स्वच्छ वातावरण के लिए पहचान रखने वाला रामनगर अब विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई के सवालों से घिरता नजर आ रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में बाग-बगीचों को हटाकर निर्माण कार्य किए जाने की चर्चाओं ने पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
ताजा मामला एक बड़े आम के बगीचे से जुड़ा है, जहां होटल निर्माण की तैयारी की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इस बगीचे में बड़ी संख्या में आम के पेड़ लगे हुए हैं। यदि निर्माण के लिए इन पेड़ों को काटा जाता है तो यह रामनगर की हरियाली के लिए बड़ा नुकसान हो सकता है।
सवाल यह है कि क्या रामनगर में विकास का मतलब अब हरे-भरे बगीचों को उजाड़कर कंक्रीट के जंगल खड़े करना रह गया है? आखिर कब तक आम के पेड़ों और प्राकृतिक संपदा की कीमत पर निर्माण कार्य होते रहेंगे?
आज दिल्ली जैसे महानगर वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में रामनगर में भी यदि लगातार पेड़ों और बगीचों को खत्म किया जाता रहा तो आने वाले समय में यहां भी प्रदूषण, बढ़ते तापमान और पर्यावरण असंतुलन जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।
आम के पेड़ केवल फल देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये पर्यावरण को संतुलित रखने, छाया देने और स्वच्छ हवा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक तरफ सरकार और विभाग पौधरोपण अभियान चलाते हैं, दूसरी तरफ यदि पुराने फलदार बगीचे ही उजाड़े जाने लगे तो इन अभियानों का क्या औचित्य रह जाएगा?
अब सवाल संबंधित विभागों से है कि क्या होटल निर्माण के लिए सभी जरूरी अनुमतियां ली गई हैं? क्या पेड़ों को बचाने का कोई विकल्प तलाशा गया है? क्या पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कोई जांच होगी?
रामनगर के लोगों को भी इस विषय पर आवाज उठानी होगी, क्योंकि आज बगीचे कटेंगे तो कल स्वच्छ हवा और हरियाली की तलाश करनी पड़ सकती है।
विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की कीमत रामनगर की हरियाली और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य होना चाहिए?
सूत्रों के अनुसार, संबंधित बगीचे को हटाकर होटल निर्माण की तैयारी की जानकारी सामने आई है। हालांकि पेड़ों की कटाई और निर्माण संबंधी अनुमतियों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
