कॉर्बेट नेशनल पार्क में धूमधाम से मना गणतंत्र दिवस, वनकर्मियों का हुआ सम्मान
रोशनी पांडेय – प्रधान संपादक
कॉर्बेट नेशनल पार्क में धूमधाम से मनाया गया गणतंत्र दिवस
पार्क निदेशक साकेत बडोला ने गिनाईं उपलब्धियां, वनकर्मियों को किया सम्मानित
रामनगर।
77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर विश्वविख्यात कॉर्बेट नेशनल पार्क में हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाने वाले वनकर्मियों एवं अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कॉर्बेट नेशनल पार्क यूं तो किसी पहचान का मोहताज नहीं है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहां की जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने पहुंचते हैं, लेकिन गणतंत्र दिवस का यह अवसर खास रहा। सघन जंगलों में लकड़ी तस्करी, वन्यजीव तस्करी और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना डटे रहने वाले कर्मचारियों के साहस और समर्पण को इस अवसर पर सराहा गया। कई बार जिन वन्यजीवों की रक्षा ये कर्मी करते हैं, उन्हीं से उन्हें जान का खतरा भी होता है, इसके बावजूद वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
इस अवसर पर कॉर्बेट नेशनल पार्क के निदेशक साकेत बडोला ने पार्क की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि कॉर्बेट नेशनल पार्क इस समय अपने 90वें स्थापना वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह एक राष्ट्रीय धरोहर है, जिसके संरक्षण के लिए राज्य सरकार और कॉर्बेट प्रशासन निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने बताया कि पर्यटन, संरक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। विदेशी पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की बुकिंग 90 दिन पूर्व तथा अन्य पर्यटकों के लिए 45 दिन पूर्व खोली जा रही है, जिससे विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई है।
अनुसंधान के क्षेत्र में शिकारी पक्षियों पर सैटेलाइट टैगिंग कर उनके व्यवहार और गतिविधियों का अध्ययन किया जा रहा है। इसके साथ ही होग डियर की जनसंख्या और उनके आवासीय क्षेत्रों को लेकर भी महत्वपूर्ण परियोजना संचालित की जा रही है।
निदेशक ने बताया कि ऑल इंडिया टाइगर सेंसस, जो प्रत्येक चार वर्ष में किया जाता है, उसके एक नए चरण की शुरुआत भी की गई है, जिसमें कैमरा ट्रैप, साइन सर्वे और टाइगर ट्रांजिट बॉक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए ग्रामीणों से निरंतर संवाद, जागरूकता अभियान और समन्वय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि वन्यजीवों के साथ-साथ मानव जीवन की भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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