आर्थिक आधार पर आरक्षण में सुधार की मांग, करणी सेना ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र
नई दिल्ली। करणी सेना ने देश में व्यापक सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना कराने तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार कर वास्तविक रूप से गरीब और वंचित परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग उठाई है। इस संबंध में संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर सामाजिक न्याय और समान अवसर की नीति को और प्रभावी बनाने की मांग की गई है।
पत्र में कहा गया है कि देश में पारदर्शी सामाजिक-आर्थिक एवं जातीय जनगणना कराई जानी चाहिए, ताकि विभिन्न समुदायों की वास्तविक सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का आंकड़ों के आधार पर आकलन हो सके।
करणी सेना ने कहा कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण के लाभों की नियमित समीक्षा जरूरी है, ताकि इनका लाभ वास्तविक गरीब एवं वंचित लोगों तक पहुंच सके। संगठन ने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए और संविधान एवं कानून के अनुरूप सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
पत्र में SC, ST और OBC सहित अन्य आरक्षित वर्गों के भीतर भी यह समीक्षा करने की मांग की गई है कि सरकारी योजनाओं एवं आरक्षण का लाभ सबसे अधिक वंचित परिवारों तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है या नहीं।
ये हैं प्रमुख मांगें
देश में व्यापक एवं पारदर्शी सामाजिक-आर्थिक व जातीय जनगणना कराई जाए।
आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं के लाभों की नियमित समीक्षा हो।
वास्तविक गरीब एवं वंचित परिवारों की पहचान के लिए सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का उपयोग किया जाए।
सभी धर्मों एवं समुदायों के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
SC/ST/OBC एवं अन्य वर्गों के भीतर सबसे अधिक वंचित परिवारों तक सरकारी लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी नीति बनाई जाए।
सामाजिक न्याय और समान अवसर की व्यवस्था को संविधान के मूल सिद्धांतों के अनुरूप मजबूत किया जाए।
करणी सेना ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए देश के गरीब और वंचित नागरिकों के हित में उचित कदम उठाएगी। पत्र की प्रतियां राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, गृह मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों तथा संबंधित मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भी भेजी गई हैं।






