कोसी रेंज में बाघ ने एक व्यक्ति को बनाया निवाला
एक मौत काफी नहीं? ढेला रेंज में मजदूरों की जान से खिलवाड़
रोशनी पांडे प्रधान संपादक
रामनगर में बाघ का कहर: कोसी रेंज में व्यक्ति की दर्दनाक मौत, ढेला रेंज में मजदूरों की जान से खिलवाड़
रामनगर।
रामनगर वन प्रभाग की कोसी रेंज में बाघ के हमले से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना गुलरसिद्ध क्षेत्र के पास बीती शाम उस समय हुई, जब व्यक्ति जंगल की ओर गया हुआ था। अचानक बाघ ने हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। वन क्षेत्राधिकारी शेखर चंद्र तिवारी के अनुसार विभागीय टीम मौके पर पहुंच चुकी है और क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आसपास के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया गया है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल और नदी किनारे के इलाकों में न जाएं।
फिलहाल मृतक की पहचान और घटना से जुड़ी अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।
कब जागेगा सिस्टम? ढेला रेंज बना ‘डेथ ज़ोन’
कोसी रेंज में हुई इस मौत के बीच कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अधिकारियों की लापरवाही मजदूरों की जान पर भारी पड़ सकती है।
कुछ दिन पहले इसी ढेला रेंज में एक महिला की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद उसी हाई-रिस्क टाइगर मूवमेंट जोन में बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूरों से सफाई का काम कराया जा रहा है।
न हथियारबंद गश्ती दल
न सुरक्षा कर्मी
न एम्बुलेंस
न कोई अलर्ट सिस्टम
लेकिन काम पूरा करने का दबाव जरूर!
यह स्थिति मजदूरों को सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसी है।
“जिसकी किस्मत में होगा, वो चला जाएगा” – ठेकेदार का शर्मनाक बयान
जब ठेकेदार श्याम सिंह से मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने अमानवीय और शर्मनाक बयान देते हुए कहा —
“जिसकी किस्मत में होगा, वो चला ही जाएगा।”
यह बयान दर्शाता है कि मजदूरों की जान इन लोगों के लिए कितनी सस्ती है।
वहीं, ढेला रेंज के रेंजर से जब इस गंभीर लापरवाही पर जवाब मांगा गया तो वे कोई लिखित आदेश, सुरक्षा प्रोटोकॉल या ठोस जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके।
अब सवाल सिर्फ लापरवाही का नहीं, आपराधिक उदासीनता का है
सबसे बड़ा सवाल यह है कि —
👉 जब एक महिला की जान जा चुकी है,
👉 जब इलाका हाई टाइगर मूवमेंट जोन घोषित है,
तो मजदूरों को बिना सुरक्षा क्यों भेजा जा रहा है?
क्या कॉर्बेट प्रशासन किसी और मौत का इंतजार कर रहा है?
यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक उदासीनता (Criminal Negligence) का बनता है।
तत्काल कार्रवाई की मांग
इस पूरे प्रकरण पर प्रदेश के मुख्यमंत्री, वन मंत्री और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को तत्काल संज्ञान लेकर
दोषी अधिकारियों
लापरवाह ठेकेदार
के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
वरना अगली खबर किसी और मजदूर की मौत की हो सकती है।






