मुख्यमंत्री धामी ने रुद्रप्रयाग में देखा विकास का नया रास्ता, पुल-सुरंग परियोजना के साथ संगम लाइब्रेरी का भी किया अवलोकन।

मुख्यमंत्री धामी ने रुद्रप्रयाग में देखा विकास का नया रास्ता, पुल-सुरंग परियोजना के साथ संगम लाइब्रेरी का भी किया अवलोकन।

रोशनी पाण्डेय – प्रधान संपादक

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को सुगम और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रुद्रप्रयाग में लगभग 156 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल-सुरंग परियोजना पर ट्रायल के आधार पर आवागमन शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को परियोजना का अवलोकन कर निर्माण कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण परियोजना का जल्द ही विधिवत लोकार्पण किया जाएगा।

इस परियोजना के शुरू होने से केदारनाथ और बदरीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मार्ग पर नियमित यातायात शुरू होने के बाद तीर्थयात्रियों को रुद्रप्रयाग बाजार से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे शहर में यातायात का दबाव कम होगा और जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

156 करोड़ की लागत से बना पुल और सुरंग

चारधाम सड़क परियोजना के अंतर्गत अलकनंदा नदी पर लगभग 200 मीटर लंबे पुल और 900.30 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। संपर्क मार्ग सहित पूरी परियोजना की कुल लंबाई लगभग 1.18 किलोमीटर है।

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यह पुल-सुरंग मार्ग केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) को बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-07) से सीधे जोड़ेगा। इससे चारधाम यात्रा के दौरान यातायात प्रबंधन बेहतर होने के साथ स्थानीय लोगों को भी आवागमन में सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सड़क संपर्क और आधुनिक आधारभूत सुविधाओं के विकास से श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा। साथ ही पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा।

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कार्यों की समीक्षा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण कार्यों की जानकारी भी ली। इन कार्यों का उद्देश्य भूस्खलन से होने वाले जोखिम को कम करना और यात्रा मार्ग को अधिक सुरक्षित बनाना है।

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संगम लाइब्रेरी पहुंचे मुख्यमंत्री, 150 पुस्तकें कीं भेंट

पुल-सुरंग परियोजना के अवलोकन के बाद मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन की पहल पर संचालित संगम लाइब्रेरी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने ‘एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं’ अभियान की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तकें ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

अभियान के तहत संगम लाइब्रेरी को अब तक 2,500 से अधिक पुस्तकें प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं, सामान्य ज्ञान, साहित्य और विभिन्न विषयों से संबंधित पुस्तकें शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अभियान में 150 पुस्तकें उपलब्ध कराकर योगदान दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से पुस्तकालयों को समृद्ध बनाना युवाओं के लिए उपयोगी पहल है। इससे विशेष रूप से उन विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकों और अध्ययन सामग्री की आवश्यकता होती है।

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जनसहयोग से विकसित हो रही अध्ययन संस्कृति

जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि अभियान के माध्यम से प्राप्त पुस्तकों को विद्यार्थियों और अन्य पाठकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि पुस्तकालयों को अध्ययन और ज्ञानवर्धन के प्रभावी केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवान, सीमांत क्षेत्र अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, भाजपा जिलाध्यक्ष भारत भूषण भट्ट, महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी, जिलाधिकारी विशाल मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह रावत सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

156 करोड़ रुपये की पुल-सुरंग परियोजना और संगम लाइब्रेरी अभियान, दोनों ही रुद्रप्रयाग में बेहतर यातायात सुविधा तथा शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।