एम्स में बेड नहीं मिला, रास्ते में गई जान! रेफरल सिस्टम पर सवाल
रोशनी पांडेय – प्रधान संपादक
पौड़ी। विकासखंड कोट में हुई एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और रेफरल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विकासखंड कार्यालय में कार्यरत सरकारी कर्मचारी भरत भंडारी अज्ञात कारणों से लगी आग में लगभग 75 प्रतिशत तक झुलस गए थे। गंभीर अवस्था में उन्हें तत्काल जिला अस्पताल पौड़ी ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, एम्स ऋषिकेश पहुंचने पर भरत भंडारी को तत्काल बेड उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे उनका उपचार समय पर शुरू नहीं हो पाया। बाद में उन्हें जॉली ग्रांट अस्पताल के लिए रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की आपातकालीन व्यवस्थाओं और रेफरल प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि जब मरीज की हालत अत्यंत गंभीर थी और उसे एम्स रेफर किया गया था, तो क्या जिला अस्पताल प्रशासन ने पहले से एम्स प्रबंधन से संपर्क कर बेड और उपचार की उपलब्धता सुनिश्चित की थी या नहीं। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना जा सकता है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने कहा है कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार किसी भी गंभीर मरीज को रेफर करने से पूर्व संबंधित अस्पताल से समन्वय स्थापित करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भरत भंडारी की मौत ने एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं, रेफरल सिस्टम और आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया है। अब इस मामले में होने वाली जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।





