#जंगल_पर_कब्जे_का_महाखेल: सीएम धामी के अतिक्रमण मुक्त अभियान के बीच वन भूमि पर होटल की कथित अवैध पार्किंग से उठे बड़े सवाल
रोशनी पांडे प्रधान सम्पादक
#जंगल पर कब्जे का महाखेल!
#सीएम धामी के अतिक्रमण मुक्त अभियान को धता बताकर वन भूमि पर होटल की अवैध पार्किंग, वन विभाग की कथित मिलीभगत पर उठे तूफानी सवाल
रामनगर के क्यारी गांव मे जंगल की जमीन पर कथित कब्जे का मामला अब बड़े घोटाले की शक्ल लेता नजर आ रहा है। एक ओर #Pushkar Singh Dhami प्रदेशभर में अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान चलाकर सरकारी भूमि को मुक्त कराने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर रामनगर में वन विभाग की कथित शह पर एक होटल संचालक द्वारा जंगल की जमीन को निजी पार्किंग में बदल देने के आरोपों ने प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस वन भूमि पर कभी पेड़ों की हरियाली और वन्यजीवों की स्वाभाविक आवाजाही होती थी, वहां अब होटल में आने वाले पर्यटकों के वाहनों की लंबी कतारें खड़ी की जा रही हैं। लोगों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के वन भूमि का इस तरह व्यावसायिक उपयोग संभव नहीं हो सकता। यही वजह है कि वन विभाग की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
इस कथित अतिक्रमण से पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा मंडराने के साथ-साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो जंगल की जमीन पर कब्जे की यह प्रवृत्ति भविष्य में और बढ़ सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री के अतिक्रमण मुक्त उत्तराखंड अभियान को स्थानीय स्तर पर कमजोर किया जा रहा है? क्या कुछ जिम्मेदार अधिकारी सरकारी नीति को ठेंगा दिखाकर निजी हितों को संरक्षण दे रहे हैं? यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह केवल वन भूमि पर कब्जे का मामला नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही तीनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, अवैध पार्किंग को तत्काल हटाने तथा दोषी होटल संचालक और कथित मिलीभगत में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
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