🚨 बेड़ाझाल में लॉपिंग के नाम पर जड़ से काटे फलदार पेड़! आमपोखरा रेंज के अधिकारी की भूमिका पर गंभीर सवाल
पहले लॉपिंग की बात कही, अब जामुन का पेड़ पूरी तरह काटे जाने का मामला; आम और जामुन के पेड़ों की कटाई पर जवाबदेही किसकी?
रोशनी दर्पण न्यूज़ | रामनगर
रामनगर। बेड़ाझाल गांव में सरकारी स्कूल के पास फलदार आम और जामुन के पेड़ों की कटाई का मामला आमपोखरा रेंज के अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। कुछ दिन पहले जब पेड़ की लॉपिंग की जा रही थी, तब इस संबंध में आमपोखरा रेंज के अधिकारी से बातचीत की गई थी। उस समय अधिकारी ने पेड़ की लॉपिंग होने की बात कही थी, लेकिन अब जामुन का पेड़ पूरी तरह काट दिए जाने से मामला गंभीर हो गया है।
लॉपिंग की बात थी, तो जड़ से पेड़ किसने काट दिया?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला अधिकारी के संज्ञान में लाया गया था, तो इसके बाद पेड़ की पूरी कटाई कैसे हुई? क्या अधिकारी को पेड़ काटे जाने की जानकारी थी? क्या पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी? यदि अनुमति दी गई थी, तो उसके आधार क्या थे? और यदि बिना अनुमति पेड़ काटा गया, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आम और जामुन जैसे फलदार पेड़ों की कटाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आमपोखरा रेंज के अधिकारी की जवाबदेही तय होना जरूरी है। आखिर वन विभाग की निगरानी में पेड़ों की कटाई की परिस्थितियां क्या थीं और इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
उच्चाधिकारी करें जांच, सामने आए सच्चाई
मामले में वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग है कि बेड़ाझाल गांव में पेड़ों की कटाई की निष्पक्ष जांच कराई जाए। अनुमति से जुड़े दस्तावेजों की जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि लॉपिंग की बात के बाद जामुन का पेड़ पूरी तरह कैसे काटा गया। जांच में यदि किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि आमपोखरा रेंज के अधिकारी इन सवालों का क्या जवाब देते हैं और वन विभाग के उच्चाधिकारी मामले में क्या कदम उठाते हैं।
रोशनी दर्पण न्यूज़ | रामनगर
