उत्तराखंड जरा हटके

पिथौरागढ़ के पैतृक गांव में उमड़ा भावनाओं का सैलाब, मां के साथ पहुंचे सीएम धामी

Spread the love

पिथौरागढ़ के पैतृक गांव में उमड़ा भावनाओं का सैलाब, मां के साथ पहुंचे सीएम धामी

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को अपनी माता जी के साथ पिथौरागढ़ जनपद स्थित अपने पैतृक गांव टुंडी-बारमौं पहुंचे। गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने गांव के प्राचीन मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।

गांव में बिताए पलों को याद करते हुए मुख्यमंत्री धामी भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि मां के साथ अपने पैतृक क्षेत्र पहुंचना उनके लिए बेहद भावुक क्षण रहा। यह वही गांव है जहां उन्होंने बचपन के सुनहरे दिन गुज़ारे, पहली बार विद्यालय का रास्ता पकड़ा और जहां की संस्कृति, परम्पराओं और गांव के स्नेह ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।

यह भी पढ़ें 👉  घर का बुझा चिराग: टेड़ा गांव के पास सड़क हादसे में युवक की जान गई।

मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव पहुंचते ही बुजुर्गों के स्नेहिल आशीर्वाद और मातृशक्ति के अथाह प्रेम ने मन को भावनाओं से भर दिया। “कई बुजुर्ग आज भी मुझे बचपन के नाम से पुकारते हैं… यह अपनत्व शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता,” उन्होंने कहा। नन्हें बच्चों और युवाओं की मुस्कुराहटों ने भी उनकी अनेक स्मृतियों को जीवंत कर दिया।

यह भी पढ़ें 👉  युवाओं से स्वदेशी अपनाने की अपील, सीएम धामी ने दौड़ का किया शुभारंभ

उन्होंने कहा कि टुंडी-बारमौं उनके लिए सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि उनकी जड़, संस्कार और पहचान है। हर आंगन, हर रास्ता और हर चेहरा उन्हें अपने बचपन की गलियों से जोड़ता है।

यह भी पढ़ें 👉  कुमाऊँ की नारी अस्मिता और देवआस्था पर अपमानजनक बयान से उबाल* *लोकसंस्कृति और देवी-देवताओं को “फर्जी” बताने पर कुमाऊँ में भारी आक्रोश* *कौतिकों में नृत्य करने वाली महिलाओं पर टिप्पणी, देवभूमि की आस्था व महिलाओं पर हमला बर्दाश्त नहीं: कुमाऊँ समाज का स्पष्ट संदेश, देवभूमि की आस्था और महिलाओं पर टिप्पणी का मामला, ज्योति अधिकारी पर मुकदमा दर्ज

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आग्रह का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने प्रत्येक उत्तराखंडवासी से अपने पैतृक घरों को संवारने और गांव के विकास में योगदान देने की अपील की है।
धामी ने कहा कि “गांव से बाहर रह रहे प्रवासी उत्तराखंडी अपने पैतृक गांवों के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपने गांव के उत्थान में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।