हरदोई उत्तर प्रदेश क्राइम

तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई हादसे में पांच लोगों की हुई मौत।

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तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई हादसे में पांच लोगों की हुई मौत।

रोशनी पांडे प्रधान संपादक

 

हरदोई जिले के सवायजपुर कोतवाली क्षेत्र में बिल्हौर-कटरा मार्ग पर खम्हरिया मोड़ पर हुए हादसे में तीन पीढि़याें समेत एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत से पूरे गांव में मातम पसर गया। सोमवार देर रात हुए हादसे की जानकारी जब गांव वालों को मिली, तो हर कोई सन्न रह गया। बच्ची की छठी पर ढोलक की थाप पर गाए जा रहे मंगल गीतों के बीच एकाएक चीख-पुकार का शोर गूंज उठा। पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम शव गांव पहुंचे। पचदेवरा थानाक्षेत्र के बराकांठ निवासी होशियार (55) खेती करते थे। छोटे बेटे गोविंद की ससुराल सांडी थानाक्षेत्र के नयागांव में है। सात दिन पहले गोविंद की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया था। नवजात का छठी संस्कार सोमवार को था।

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इसमें शामिल होने के लिए होशियार बड़े बेटे मुकेश (30), मुकेश के पुत्र अमित उर्फ बल्लू (4), चचेरे भाई राजाराम (50) और भतीजे मनोज (30) के साथ कार से नयागांव जा रहे थे। कार मुकेश चला रहा था।बिल्हौर-कटरा मार्ग पर सवायजपुर में खम्हरिया मोड़ पर अनियंत्रित कार पेड़ से टकरा गई। इसमें कार सवार सभी लोगों की मौत हो गई। नयागांव में गोविंद के ससुरालीजन रिश्तेदारों के आने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें हादसे की खबर मिली। पहले तो मामूली हादसा समझकर गोविंद अपने साले के साथ सीएचसी सवायजपुर पहुंचा, लेकिन जब यहां पांच शव देखे, तो परिजनों को सूचना दी। इसके बाद रिश्तेदारों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ।पेड़ से टकराने के बाद कार के परखच्चे उड़ गए।

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तीन शव तो किसी तरह निकाल लिए गए, लेकिन दो शव कार के अंदर ही बुरी तरह फंस गए। इसके लिए पहले जेसीबी मंगाकर कार पीछे की गई, इसके बाद कटर और अन्य उपकरणों के जरिए कार को काटा गया। तब अंदर फंसे मुकेश और होशियार को निकाला जा सका। सवायजपुर कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह और उनकी टीम कार में फंसे शवों को निकालने के लिए मशक्कत करती नजर आई।घटना की जानकारी पर सवायजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा गोविंद परिवार के पांच लोगों के शव एक साथ देख बदहवास हो गया।

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पिकअप से जैसे-जैसे भाई मुकेश, भतीजे बल्लू उर्फ अमित और फिर पिता होशियार के शव उतरे तो शिनाख्त करने के साथ ही गोविंद गश खाकर गिर पड़ा। गोविंद सिर्फ अपना सिर पकड़े बैठा रहा और बार-बार अपने पिता और भाई के शव से लिपटकर फफकता रहा।