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विश्व बाघ दिवस पर कार्बेट टाइगर रिजर्व में संरक्षण का संदेश: विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को किया जागरूक

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विश्व बाघ दिवस पर कार्बेट टाइगर रिजर्व में संरक्षण का संदेश: विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को किया जागरूक

 रोशनी पांडे प्रधान सम्पादक 

 

रामनगर। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर 29 जुलाई 2026 को कार्बेट टाइगर रिजर्व में विभिन्न रेंजों एवं वन्यजीव प्रशिक्षण केन्द्रों में व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय, पर्यटकों एवं प्रकृति प्रेमियों में बाघ संरक्षण, जैव-विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस अवसर पर बाघ संरक्षण से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी, शैक्षिक भ्रमण, विचार-गोष्ठी, स्वच्छता अभियान एवं संरक्षण की शपथ जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रमों की शुरुआत कार्बेट टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला, आईएफएस के नेतृत्व में हुई, जहां विद्यार्थियों और पर्यटकों को बाघ संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों ने बाघों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास, जैव-विविधता, मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम तथा वन संरक्षण की विभिन्न गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। विद्यार्थियों को जंगल भ्रमण एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण की व्यवहारिक जानकारी भी प्रदान की गई, जिससे उनमें प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति विशेष उत्साह एवं जिज्ञासा देखने को मिली।
इसी क्रम में सर्पदुली रेंज के धनगढ़ी इंटरप्रिटेशन सेंटर में वन क्षेत्राधिकारी संजय पाण्डे के नेतृत्व में राजकीय इंटर कॉलेज, ढिकुली के छात्र-छात्राओं के साथ विश्व बाघ दिवस मनाया गया। विद्यार्थियों को कार्बेट टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव-विविधता, बाघों के पदचिह्नों की पहचान, संरक्षण उपायों तथा पर्यावरणीय संतुलन में बाघों की भूमिका की जानकारी दी गई। आधुनिक प्रदर्शनों के माध्यम से उन्हें कार्बेट के प्राकृतिक इतिहास और वन्यजीव संरक्षण से भी परिचित कराया गया।
कालागढ़ वन्यजीव प्रशिक्षण केन्द्र में वन क्षेत्राधिकारी इन्द्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में विचार-गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें स्थानीय समुदाय को बाघ संरक्षण में उनकी भागीदारी के महत्व से अवगत कराया गया। प्रशिक्षु वन आरक्षियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम के उपरांत प्रशिक्षण केन्द्र परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों का वैज्ञानिक निस्तारण किया गया।

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कार्यक्रमों के दौरान बाघ रक्षक विद्यालय ढेला, ढिकुली एवं कालागढ़ के छात्र-छात्राओं को बताया गया कि भारत में वर्तमान में लगभग 3,682 बाघ हैं तथा विश्व के लगभग 70 प्रतिशत बाघ भारत में पाए जाते हैं। यह उपलब्धि प्रभावी संरक्षण नीतियों, वन विभाग, स्थानीय समुदायों एवं संरक्षण सहयोगियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। विद्यार्थियों से बाघों एवं उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान भी किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, वन कर्मियों एवं स्थानीय लोगों ने वनों में अवैध गतिविधियों की रोकथाम, प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण के निर्माण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जन-जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया।

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अपने संदेश में फील्ड डायरेक्टर डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि “बाघ केवल एक वन्यजीव नहीं, बल्कि सम्पूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। बाघों का संरक्षण हमारी जैव-विविधता, जल स्रोतों, वनों तथा भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने सभी नागरिकों से वन्यजीवों एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता निभाने की अपील की।

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विश्व बाघ दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने विद्यार्थियों, स्थानीय समुदाय और पर्यटकों के बीच यह संदेश प्रभावी रूप से पहुँचाया कि प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है।